MOTILAL BANARSIDASS PUBLISHING HOUSE (MLBD) SINCE 1903

SKU: 9789359712192 (ISBN-13)  |  Barcode: 9359712191 (ISBN-10)

Shyamacharan Kriyayoga or Advaitavad (श्यामाचरण क्रियायोग व अद्वैतवाद)

Binding
₹ 350.00

Pages : 275

Edition : 10th Reprint

Size : 5.5" x 8.5"

Condition : New

Language : Bengali

Weight : 0.0-0.5 kg

Publication Year: 2025

Country of Origin : India

Territorial Rights : Worldwide

Reading Age : 13 years and up

HSN Code : 49011010 (Printed Books)

Publisher : Motilal Banarsidass Publishing House


भाषाओं में इनके ग्रन्थ अनुवादित व प्रकाशित हो चुके हैं। लोग सटीक क्रियायोग का संधान पा सके इस उद्देश्य में इन्होंने स्थापना को है ८० चौबीस परगना के काकद्वीप में श्योगिराज श्यामाचरण सनातन मिशन की। परवर्ती काल में फ्राँस के लेमों शहर के उपकण्ठ में इसकी एक शाखा खोली गयी जिसके में चपजपतनस वपतमबजवत है। अगणित आर्त एवं पीड़ित जन को सुचिकित्सा एवं उनमें अन्न व वस्त्र वितरण में ये सदा ही नियोजित रहते हैं।

फ्राँस के थैल सेंट ह्यूगन शहर में महात्मा दलाई लामा की परिचालना एवं रुन्छौक नहन्द के सीधे तत्वावधान में विगत सन् १९९७ में आयोजित विश्व धर्म महासभा में एकमात आमंवित भारतीय प्रतिनिधि के रूप में योगदान कर इन्होंनें भारत के सनातन योगधर्म को उदात्त श्कण्ठ से विश्ववासियों के समक्ष प्रतिस्थापित किया। इनके असाधारण पाण्डित्य एवं वाग्मिता से मुग्ध हो सम्मेलन में योगदानकारी भिन्न भिन्न धर्मा के प्रतिनिधियों वैज्ञानिकों, दार्शनिकों एवं समुपस्थित समस्त दर्शकों व श्रोताओं ने इन्हें पैम बतजोल क्पहदपधिमक हम, ममत, टपेपवदतल के रूप में विभूषित किया था।

इत्स महाज्ञानी की जागतिक मानव सेवा, अध्यात्म सेवा एवं साहित्य सेवा से मुग्ध हो तिरूपत्ति राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने हाल ही में इन्हें श्वाचस्पतिर (क स्पजज) उपाधि से विभूषित किया है।

लेखक के बारे में

ग्रन्थकार योगाचार्य श्री अशोक कुमार चट्टोपाध्याय अध्यात्म जगत में एक विश्ववरेण्य व्यक्तित्व है। ये वतसक ज्ञतपलरवहं- डेंजमत है। समग्र भारतवर्ष में धर्म निर्विशेष रूप से हिन्दुओं, मुसलमानों, ईसाइयों, बौद्धों, जैनों एवं बाग्ला, हिन्दी, उड़िया, असमिया, तेलगू, मराठी. गुजराती, मलयालाम भाषाभाषियों में इनके शिश्य अनुगामी भरे पड़े हैं। भारतवर्ष के बाहर भी यथा अमेरिका, इंग्लैण्ड, फ्राँस, स्पेन, कनाडा, आस्ट्रेलिया द० कोरिया, बांग्लादेश सह अन्य अनेक देशों में इनके बहुत से भक्त शिष्य हैं। भारतीय सनातन धर्म के ध्रुवतारा योगिराज श्रीश्यामाचरण लाहिड़ी महाशय की योगसाधना, जो शक्रियायोगश के नाम से सुपरिचित है, के प्रचार व प्रसार के उद्देश्य से समग्र भारत सह पृथ्वी के विभिन्न देशों का अक्लान्त भाव से इन्होनें भ्रमण किया है। इनके जीवन का एक ही उद्देश्य है और वह है योगिराज के आदर्श, उनकी योगसाधना एवं उनके उपदिष्ट ज्ञान भण्डार को पृथ्वीवासियों के समक्ष प्रस्तुत कर देना ताकि वे सत्यलोक एवं सत्य पथ का संन्धान पा सकें। इसी उद्देश्य से अपने असाधारण पाण्डित्य के बल इन्होंने रचना की है बांग्ला भाषा में विभिन्न ग्रन्थों की यथा श्पुराण पुरुष योगिराज श्रीश्यामाचरण लाहिड़ीश, श्प्राणामयम् जगतश्, श्श्यामाचरण क्रियायोग व अद्वैतवादश, श्योग प्रबन्धे भारतात्माश्, श्सत्यलोके सत्यचरणश् श्के एइ श्यामाचरणश् एवं सम्पादन किया है पाँच खण्डों में प्रकाशित श्योगिराज श्यामाचरण ग्रन्थावली का। भारत के विभिन्न भाषाओं यथा हिन्दी, उड़िया, तेलगू, मराठी, गुजराती, तमिल सह अंग्रेजी एवं फ्राँसीसी

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